Thursday, July 9, 2009

गे पर गंभीर हों

गे विषय पर चर्चा ने आज पूरे समाज को गंधवा दिया है। गे का काम जितना घृणित है उससे विभत्स गे की चर्चा है। मैं न्यायालय और उसके फैसले का पूरा सम्मान करता हूं लेकिन यह हकीकत है कि आज लोग गे न भी कहें और दिल्ली हाईकोर्ट भर कह देते हैं तो लोग मतलब निकाल ले रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी मैं बडे शहरों की तो नहीं जानता लेकिन छोटे शहरों में सिर्फ गे की ही चर्चा है लेस्बियन की नहीं।

ऐसा नहीं है कि लेस्बियन गे से कम हैं लेकिन लोगों की चर्चा का केंद्र केवल गे ही है। अपने यूपी में तो बहुतेरे जिले हैं प्राचीन काल से इन कार्यों के लिए जानते हैं। पूरे शहर में इस बात की भी चर्चा है कि बलिया में इस फैसले के बाद खूब मिठाईयां बंटीं। हकीकत जो भी हो लेकिन नुक्कड से लेकर चैराहों और चाय पान की बैठकी तक में सिर्फ और सिर्फ गे ही छाया हुआ है। सरकारी कार्यालयों में लंच टाइम में बहस का यह बहुत बडा मुद्दा बनकर उभर रहा है।

मजे की बात तो यह है कि जो पुराने गे हैं वो भी कभी कभी इन चर्चाओं में बैठकी करते हैं तो झेंप से जाते हैं। उनके उठते ही लोग उनके बारे में भी तरह तरह की बात करने लगते हैं। जब से यह प्रकरण उठा तब से कई लोगों ने इस पूरे प्रकरण पर कई सवाल उठाए हैं जो मैं यहां ब्लाॅगरों के समक्ष रखना चाहता हूं। मसलन समलैंगिकता को यदि कानूनी जामा पहना दिया गया तो फिर संपत्ति अधिनियम में भी भारी फेरबदल करना होगा।

फिर उन पुरूषों और महिलाओं को भी आगे की लडाई लडने का मार्ग खुल जाएगा या फिर आसान हो जाएगा जो जानवरों से सेक्स की भूख मिटाने का काम चोरी छिपे करते हैं। इस तरह का अप्राकृतिक यौन संबंध धडल्ले से कायम किया जा रहा है। उनमें भी उम्मीद की किरण जगी है।

जो अप्राकृतिक यौन संबंधों से बहुत दूर हैं उनका भी अपना तर्क है और वो भी खासे खुश हैं। उनका कहना है कि अगर इस कानून को अमली जामा पहनाया गया तो उन्हें भी लाभ होगा। पूछा कैसे तो बताया कि मान लीजिए 100 में 20 फीसदी लोग गे निकल गए तो उनके हिस्से में आने वाला विपरीत लिंगी तो बचे 80 फीसदी लोगों के ही खाते में जाएगा। बात तो सही है लेकिन यह बहस जिस ओर मुड चुकी है उसका परिणाम कोई बहुत अच्छा नहीं आने वाला है। सरकार को और देश के राजनेताओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए वरना वो भी नहीं बचेंगे क्योंकि तब गे भी संसद और विधानसभाओं में 20 फीसदी आरक्षण की मांग करने लगेंगे।
संजय कुमार मिश्र

1 comments:

हर्षवर्धन said...

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी

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